एक ही राह
एक रात के फासले
वस्ल की तलाश में एक पंछी
समूल का बिछ्डा हुआ फूल
कही से कही फिरते है बादल
हमसफ़र कहां हो तुम
सफर तो जारी है मगर
आ चुकी है आसमान में झलक रात की
अब रात की तन्हाई में
जाऊ
कहां, जाऊ कहां
और भी है रास्ते मगर
एहसान है आपका
कि ख़त्म होते है फासले हर पल
यादों में खोकर
आप के ही
यादों में खोकर.


